Author: Premendra Agrawal

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नेहरू शेख अब्दुल्ला द्वारा पैदा किये गये कश्मीर मसले को कर रहें हैं खत्म पीएम मोदी केंद्र की मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता में आने के बाद जिस मिशन कश्मीर और पूर्वोत्तर को धार दी, उसके पीछे पीएम मोदी के विजन के साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल के सिद्धांतों की प्रेरणा भी है। मोदी सरकार के इन कदमों से न सिर्फ जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं में कमी और पर्यटकों की संख्या में रिकार्ड तेजी आई है, बल्कि पूर्वोत्तर में आठ हजार से ज्यादा उग्रवादियों ने हथियार डालकर शांति और अमन की राह पकड़ी है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने…

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Om HINDUTVA Rare footage of BBC by a British journalist who filmed “Swatantrya Veer Savarkar.” In Cellular Jail. All those insulting him are intending to insult the freedom movement of India and undermine the revolutionaries who led to Independent India. pic.twitter.com/wHcko9Hikh — Sameet Thakkar (@thakkar_sameet) November 20, 2022 Tags: 1963 movie clipAndaman JailcellularMakhanlal ChaturvediPoems written on coal nailsPushp Ki AbhilashaVeer Savarkar

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स्वातंत्र्य वीर सावरकर को फिल्माया बीबीसी के एक ब्रिटिश पत्रकार ने, सेलुलर जेल में। वीर सावरकर, भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल आदि का अपमान करने वाले सभी लोग, भारत को स्वतंत्रता सिर्फ अहिंसा से मिली कहकर क्रांतिकारियों को कमजोर करने का इरादा रखते हैं। http://twitter.com/i/status/1594244829068001282 काला पानी की सजा के दौरान सेलुलर जेल में स्वातंत्र्य वीर सावरकर ने जेल की दीवारों पर कील व कोयले से लिखी ६००० कवितायें , फिर कंठस्थ की। सेलुलर जेल में काला पानी की सजा भुगतने और भारत माता की जय का नारा लगा कर फांसी के फंदे को हंसते हुए चूमने वालों की लिस्ट प्रकाशित…

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In ancient times, when paper was not invented for writing, then Vedas and Puranas were specially composed by writing on Bhojpatra, Palm Patra, Tamra Patra. Ancient inscriptions are also found on the walls of the temples. Bhojpatra is such a rare paper that was obtained from the dense forests of the foothills of the Himalayas. Efforts are now being made to revive the rich heritage of ancient India by planting a rare Bhojpatra tree in a nursery of the spiritual city of Deoghar.Bhojpatra plant has been brought from Himachal and planted here. The specialty of this plant is that when…

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पुरातनकाल में जब लिखने के लिए कागज का आविष्कार नहीं हुआ था, तब वेदों और पुराणों की रचना विषेशकर भोजपत्र, पाम पत्र, ताम्रा पत्र पर लिखकर की गई थी। मंदिरों की दीवालों पर भी प्राचीन शिलालेख पाए जाते हैं। भोजपत्र एक ऐसा दुर्लभ पत्र है जो हिमालय की तराई के घने जंगलों से प्राप्त किया जाता था। आध्यात्मिक नगरी देवघर के एक नर्सरी में भोजपत्र का दुर्लभ पेड़ लगाकर प्राचीन भारत की समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयत्न अब हो रहा है। भोजपत्र के पौधे को हिमाचल से लाकर यहां लगाया गया है। इस पौधे की विशेषता है कि…

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Most of the writing was done on palm leaves in South India. First of all the leaves were plucked and dried in the shade and then kept hanging in the kitchen for several days to soften. Then, for the purpose of making a plane for writing on the leaves, they were rubbed on the stones very well. Later, writing was done by punching holes in the leaves with a pointed iron. Later carbon ink was rubbed on it. This filled the hole with carbon and thus the writing became visible. Efforts were also made to protect the leaves from insects…

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दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा ताड़ के पत्तों पर लेखन हुआ। सबसे पहले पत्ते को तोड़कर छांव में सुखाया जाता था और फिर साफ्ट करने के लिए किचन में कई दिनों तक टांग कर रखा जाता था। फिर पत्ते पर लिखने के लिए प्लेन बनाने के मकसद से इन्हें पत्थरों पर बड़े सलीके से रगड़ा जाता था। बाद में नुकीले लोहे से पत्तों में छिद्र करके लिखा जाता था। बाद में इसपर कार्बन इंक रगड़ा जाता था। इससे छिद्र में कार्बन भर जाता था और इस तरह लिखावट दिखने लगती थी। पत्ते को कीड़े से बचाने और कार्बन ना छूटे,…

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Knowledge of the past is necessary for the betterment of the present. Palm leaf manuscripts that preserve our traditions, historical heritage and glorious past are prominent in this. The writings on palm leaves contain valuable information about India’s past. Turning the pages of history, it is known that kings and emperors used to write about their times on stone pieces, pillars and palm leaves. Like the kings of the Chola dynasty. Palm leaf manuscripts are manuscripts made out of dried palm leaves. Palm leaves were used as writing materials in the Indian subcontinent and in Southeast Asia dating back to…

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वर्तमान की बेहतरी के लिए अतीत का ज्ञान जरूरी है। हमारी परंपराओं ऐतिहासिक धरोहरों व गौरवशाली अतीत को संजोने वाले ताड़पत्र पांडुलिपियां इसमें प्रमुख हैं। ताड़पत्र पर लिखी इबारतें भारत के अतीत की बहुमूल्य जानकारियों को समेटे हुए हैं। इतिहास को पन्नों को पलटकर देखें तो पता चलता है कि राजा-महाराजा अपने समय का हाल पत्थर के टुकड़ों, खंभों और ताड़पत्रों पर लिखवाते थे, जैसे चोल वंश के राजा। पाम पत्ती पांडुलिपियों हैं पांडुलिपियों सूखे खजूर के पत्ते से बाहर कर दिया। पाम के पत्तों के रूप में इस्तेमाल किया गया सामग्री लेखन में भारतीय उपमहाद्वीप और में दक्षिण पूर्व…

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Uthiramerur, 30 km from Kanchipuram is 1250 years old. The village named Uthiramerur, 30 km from the famous Kanchipuram of Tamil Nadu, is about 1250 years old. The village had a model electoral system and a written constitution prescribing the manner of election. It is one of the oldest temples of democracy.Vaikuntha Perumal Temple is located in Kanchipuram, Tamil Nadu.On the platform wall of the Vaikuntha Perumal (Vishnu) temple here, state edicts of the Chola dynasty are recorded during the year 920 AD. Many of these provisions are also in the existing Model Election Code. It was inscribed on the…

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